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नीट पेपर लीक पर घमासान:शिवसेना (उद्धव ठाकरे) ने किया सोनम वांगचुक के आंदोलन का समर्थन, शिक्षा मंत्री से मांगा इस्तीफा!

गंगा सफाई के लिए जान देने वाले डॉ. जीडी अग्रवाल का जिक्र कर शिवसेना ने घेरा— कहा, 'इस सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता'

रायपुर (छत्तीसगढ़): देश में लगातार लीक हो रहे प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपरों और नीट (NEET) विवाद के खिलाफ दिल्ली में चल रहे आंदोलन को शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने अपना पूर्ण समर्थन दिया है। शिवसेना द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला गया है।

शिवसेना ने छात्रों, युवाओं और बेरोजगारों की मांग का समर्थन करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग की है। साथ ही, दिल्ली में कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे विख्यात पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक और अभिजीत दीपके के आंदोलन को शिवसेना के राष्ट्रीय प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपना समर्थन घोषित किया है।

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सोनम वांगचुक के गिरते स्वास्थ्य पर चिंता

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सोनम वांगचुक के आंदोलन की सराहना की है, लेकिन कई दिनों से जारी भूख हड़ताल के कारण उनके गिरते स्वास्थ्य पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

“सोनम वांगचुक जी को अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर देनी चाहिए, क्योंकि आज देश और देश की जनता को उनकी बेहद जरूरत है।”
— शिवसेना (UBT) विज्ञप्ति

प्रेस नोट में कहा गया कि सोनम वांगचुक को विदेशों से करोड़ों रुपये के प्रस्ताव आ रहे हैं, लेकिन वे सब ठुकराकर देश के युवाओं के हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। इससे पहले भी लद्दाख की जनता के हित में आवाज उठाने पर केंद्र सरकार द्वारा उन पर कथित तौर पर फर्जी मुकदमा बनाकर राजस्थान की जेल में बंद रखा गया था।

सरकार की उदासीनता पर उठाए सवाल (यूपीए बनाम वर्तमान सरकार)

शिवसेना ने वर्तमान भाजपा सरकार को “गूंगी और बहरी” बताते हुए कहा कि इसे युवाओं और छात्रों के आंदोलन की गूंज सुनाई नहीं दे रही है। विज्ञप्ति में इतिहास का हवाला देते हुए दो प्रमुख उदाहरण दिए गए:

डॉ. जी.डी. अग्रवाल का मामला: गंगा नदी की सफाई के लिए आंदोलन करते हुए पर्यावरणविद् डॉ. जी.डी. अग्रवाल ने अपनी जान दे दी, लेकिन वर्तमान सरकार और मीडिया ने इस पर ध्यान नहीं दिया।

अन्ना हजारे का आंदोलन (यूपीए शासनकाल): यूपीए सरकार के समय जब अन्ना हजारे ने जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल की थी, तब तत्कालीन सरकार ने उनकी मांगों को सुना और उस पर काम शुरू किया था। उस समय की मीडिया ने भी जन-जन तक आवाज पहुंचाई थी, लेकिन आज स्थितियां बदल चुकी हैं।

जनता और मीडिया से आगे आने की अपील

शिवसेना ने देश के सभी राजनीतिक दलों, समाजसेवियों, छात्रों, युवाओं, मजदूरों, किसानों और आम जनता से आह्वान किया है कि वे इस आंदोलन का समर्थन करने के लिए आगे आएं। इसके साथ ही, निष्पक्ष मीडिया से मांग की गई है कि वह राष्ट्रहित में अपनी अग्रणी भूमिका निभाए और छात्रों व बेरोजगारों के इस आंदोलन को देश के कोने-कोने तक पहुंचाए, ताकि सच जनता के सामने आ सके।

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