रावघाट प्रभावित क्षेत्र में एंबुलेंस न मिलने से 12 वर्षीय मासूम की मौत
37 गोद लिए गांवों में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह फेल: शिव पोटाई

- ब्यूरो रिपोर्ट/Jungle News Live
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अंतागढ़/ कांकेर : छत्तीसगढ़ के बस्तर-कांकेर स्थित रावघाट माइंस प्रभावित क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली का एक बेहद दर्दनाक और हृदयविदारक मामला सामने आया है। प्रभावित ग्राम फूलपाड़ में समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण एक 12 वर्षीय मासूम बच्चे की जान चली गई। इस घटना ने पूरे प्रशासनिक तंत्र और बीएसपी (BSP) प्रबंधन के दावों की पोल खोल कर रख दी है।
रक्षाबंधन के दिन शव पर बांधी गई राखी
यह घटना इसलिए भी अधिक मार्मिक हो जाती है क्योंकि यह रक्षाबंधन के समय घटी। जिस भाई की कलाई पर बहनों को राखी बांधनी थी, एंबुलेंस के अभाव में उसी भाई की मौत के बाद बहनों ने उसके शव पर राखी बांधकर उसे अंतिम विदाई दी। इस अमानवीय विफलता ने क्षेत्र के लोगों को झकझोर कर रख दिया है।
इस घटना को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) बस्तर ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए बीएसपी प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन की कड़ी निंदा की है।
37 गोद लिए गांवों में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह फेल: शिव पोटाई
आम आदमी पार्टी के जिला महासचिव एवं विधानसभा प्रभारी शिव पोटाई ने घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बीएसपी ने रावघाट क्षेत्र के 37 गांवों को गोद लिया है, लेकिन वहां स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई हुई है। उन्होंने कहा : “यदि किसी बीमार या घायल बच्चे को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस तक नहीं मिल पाती है, तो यह केवल व्यवस्था की नाकामी नहीं, बल्कि जिम्मेदार संस्थाओं की घोर संवेदनहीनता है।” शिव पोटाई ने सवाल उठाया कि जब इन 37 गांवों को गोद लिया गया है, तो वहां नियमित एंबुलेंस, डॉक्टर और आपातकालीन सेवाएं क्यों उपलब्ध नहीं हैं? उन्होंने स्पष्ट किया कि कंपनी की जिम्मेदारी सिर्फ खनन तक सीमित नहीं हो सकती; आदिवासियों को मूलभूत सुविधाएं देना भी उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। आप नेताओं ने सरकार और बीएसपी प्रबंधन से इस मामले में तत्काल संज्ञान लेने की अपील करते हुए मांगें रखी हैं कि:
• उच्चस्तरीय जांच: फूलपाड़ की इस दर्दनाक घटना की निष्पक्ष जांच हो और एंबुलेंस में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
• आर्थिक सहायता: मृतक बच्चे के शोक संतप्त परिवार को उचित और सम्मानजनक आर्थिक मुआवजा दिया जाए।
• 24 घंटे स्वास्थ्य सेवाएं: रावघाट प्रभावित सभी 37 गांवों में तत्काल 24 घंटे एंबुलेंस सेवा, पर्याप्त स्वास्थ्यकर्मी और जीवनरक्षक दवाइयों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने प्रशासन और बीएसपी प्रबंधन को सीधी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि प्रभावित गांवों की स्वास्थ्य व्यवस्था में तत्काल सुधार नहीं किया गया, तो ग्रामीण साथ मिलकर एक बड़ा और चरणबद्ध आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
अब देखना होगा आगे इस मामले में प्रशासन क्या कदम उठाता है? बीएसपी प्रबंधन पर कार्यवाही होगी या मामला रफ़दफा कर दिया जाएगा।




