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भानुप्रतापपुर: गोदावरी माइंस विवाद में शिवसेना ने दी प्रशासन को खुली चेतावनी— ‘जांच नहीं हुई तो होगा उग्र आंदोलन’

शिवसेना ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, लगाए गंभीर आरोप

भानुप्रतापपुर / उत्तर बस्तर कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर क्षेत्र में संचालित गोदावरी माइंस (कच्चे) का विवाद अब और गरमा गया है। माइंस परिसर में हाल ही में हुई ‘डस्ट धंसने’ की गंभीर घटना के बाद अब इस मामले में राजनीतिक मोड़ आ गया है। माइनिंग नियमों की उड़ती धज्जियों और डस्ट मटेरियल के अवैध परिवहन को लेकर शिवसेना ने मोर्चा खोल दिया है। शिवसेना ने सीधे तौर पर प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि इस काले खेल को तुरंत नहीं रोका गया, तो वे ग्रामीणों के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन करेंगे।

शिवसेना ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, लगाए गंभीर आरोप

 

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शिवसेना ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, लगाए गंभीर आरोप

मामले की गंभीरता को देखते हुए शिवसेना के प्रदेश महासचिव चंद्रमौली मिश्रा ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व/SDM) और पूर्व वन मण्डलाधिकारी, भानुप्रतापपुर को एक लिखित शिकायत और ज्ञापन सौंपा है।

शिवसेना ने अपनी शिकायत में गोदावरी माइंस प्रबंधन पर नियमों को ताक पर रखकर काम करने के बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। शिवसेना नेता ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए तत्काल एक विशेष टीम का गठन किया जाए।

बिना रॉयल्टी और टीपी (TP) के सरकारी राजस्व को चूना!

प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में शिवसेना ने आरोप लगाया है कि:

  • माइंस परिसर में डस्ट धंसने की घटना के बाद से प्रबंधन बिना किसी वैधानिक अनुमति के काम कर रहा है।

  • धंसे हुए डस्ट मटेरियल को बिना किसी निर्धारित दस्तावेजी प्रक्रिया, ट्रांजिट पास (TP) और बिना रॉयल्टी भुगतान के अवैध रूप से माइंस से बाहर ले जाया जा रहा है।

  • इस अवैध परिवहन से शासन को हर दिन बड़े पैमाने पर राजस्व (रॉयल्टी चोरी) की भारी क्षति हो रही है।

ग्रामीण इलाकों में अवैध डंपिंग: जनता की सेहत से खिलवाड़

शिवसेना ने अपनी शिकायत में खनिज भंडारण और परिवहन अधिनियमों के उल्लंघन का जिक्र करते हुए कहा कि इस डस्ट मटेरियल को निकटवर्ती गांवों और खुले क्षेत्रों में बेतरतीब ढंग से डंप किया जा रहा है।

“खुले में हो रही इस डंपिंग के कारण उड़ने वाली धूल से आसपास के गांवों में भारी वायु प्रदूषण फैल रहा है। इससे न सिर्फ उपजाऊ कृषि भूमि बर्बाद हो रही है, बल्कि मासूम ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर संकट मंडरा रहा है। बिना सुरक्षा उपायों के चल रहे इस काम से कभी भी कोई बड़ी सड़क दुर्घटना हो सकती है।” — चंद्रमौली मिश्रा, प्रदेश महासचिव, शिवसेना

प्रशासन को खुली चेतावनी: ‘आर-पार की होगी लड़ाई’

शिवसेना ने स्थानीय स्तर पर निगरानी न होने के कारण खनिज, वन और राजस्व विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। शिवसेना नेता चंद्रमौली मिश्रा ने साफ शब्दों में प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा:

“अगर प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया और अवैध परिवहन व डंपिंग पर तुरंत रोक नहीं लगाई, तो शिवसेना पार्टी स्थानीय ग्रामीणों को साथ लेकर माइंस के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन और उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी। इसके बाद क्षेत्र में निर्मित होने वाली किसी भी परिस्थिति और कानून व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।”

अब देखना यह होगा कि शिवसेना के इस कड़े रुख और अल्टीमेटम के बाद भानुप्रतापपुर प्रशासन और खनिज विभाग की नींद टूटती है या नहीं।

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Santosh Garg

Jungle News का Chief Editor हूं। पत्रकारिता मेरे लिए सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज की आवाज़ को सही मंच देने का माध्यम है। मैं जल, जंगल, जमीन, पर्यावरण, आदिवासी समाज और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों को निष्पक्षता और जिम्मेदारी के साथ सामने लाने का प्रयास करता हूं। मेरा उद्देश्य उन खबरों को लोगों तक पहुंचाना है जो समाज, संस्कृति और जनहित से सीधे जुड़ी हैं।

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