छत्तीसगढ़ के जाँबाजों का दिल्ली में डंका: बस्तर के ‘राम-लक्ष्मण’ और असम राइफल्स के भोजराम साहू ‘शौर्य चक्र’ से सम्मानित
राम-लक्ष्मण' यानी निरीक्षक लक्ष्मण केवट और निरीक्षक रामेश्वर देशमुख

भानुप्रतापपुर/संतोष गर्ग
नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के इतिहास में आज का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में देश के सबसे प्रतिष्ठित वीरता पुरस्कारों में से एक ‘शौर्य चक्र’ से छत्तीसगढ़ के तीन जांबाज सपूतों को सम्मानित किया गया। महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इन वीरों को उनकी अदम्य बहादुरी के लिए अपने हाथों से इस सर्वोच्च सम्मान से नवाजा।
इस गौरवमयी क्षण के साक्षी बनते ही पूरे छत्तीसगढ़ का सीना गर्व से चौड़ा हो गया है। सम्मानित होने वाले जांबाजों में बालोद के रहने वाले असम राइफल्स के जवान भोजराम साहू और बस्तर के जंगलों में नक्सलियों के काल बन चुके पुलिस महकमे के ‘राम-लक्ष्मण’ यानी निरीक्षक लक्ष्मण केवट और निरीक्षक रामेश्वर देशमुख शामिल हैं।
1. सीने में गोली खाकर भी आतंकियों को धूल चटाने वाले भोजराम साहू को मिला सम्मान
बालोद जिले के डौंडी इलाके के एक छोटे से गांव ‘ढोर्रीठेमा’ के रहने वाले असम राइफल्स के जवान भोजराम साहू की शौर्य गाथा रोंगटे खड़े कर देने वाली है, जिसके लिए आज उन्हें शौर्य चक्र प्रदान किया गया।
- तारीख और घटना: 15 नवंबर 2024 को मणिपुर के टेंगनोपाल में आतंकियों के छिपे होने की सूचना पर भोजराम अपनी टीम के साथ मोर्चे पर तैनात थे। सुबह करीब 9:30 बजे आतंकियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।
- अदम्य साहस: इस मुठभेड़ के दौरान एक गोली सीधे भोजराम के सीने में जा लगी। घाव गहरा था और खून तेजी से बह रहा था, लेकिन इस वीर ने हार नहीं मानी। घायल अवस्था में भी उन्होंने ट्रिगर से उंगली नहीं हटाई और लगातार गोलियां बरसाते रहे।
- नतीजा: भोजराम की इस बहादुरी के आगे आतंकियों को घुटने टेकने पड़े। इस मुठभेड़ में सेना ने 3 खतरनाक आतंकियों को ढेर कर दिया और बाकी को मैदान छोड़कर भागना पड़ा।
2. बस्तर के ‘राम-लक्ष्मण’: जिन्होंने एक ही एनकाउंटर में 29 नक्सलियों को किया था ढेर
बस्तर और राजनांदगांव के दुर्गम बीहड़ों में नक्सलियों के बीच खौफ का दूसरा नाम बन चुके निरीक्षक लक्ष्मण केवट और निरीक्षक रामेश्वर देशमुख को पुलिस महकमे में ‘राम-लक्ष्मण’ की जोड़ी कहा जाता है। लक्ष्मण केवट अब तक 97 और रामेश्वर देशमुख 56 नक्सली ऑपरेशनों को लीड कर चुके हैं। आज इन दोनों के कंधों पर शौर्य चक्र का तमगा सज गया है।
इतिहास का सबसे बड़ा ऑपरेशन (16 अप्रैल 2024)
इन दोनों अफसरों की बहादुरी की सबसे बड़ी मिसाल पिछले साल 16 अप्रैल 2024 को कांकेर के हापाटोला जंगल में देखने को मिली थी।
- दोनों जांबाज अफसरों ने खुद फ्रंट पर रहकर टीम की कमान संभाली।
- इस ऐतिहासिक मुठभेड़ में टीम ने 15 महिला नक्सलियों समेत कुल 29 नक्सलियों को मार गिराया था।
- छत्तीसगढ़ के इतिहास में यह अब तक का सबसे बड़ा, सफल और क्लीन एनकाउंटर माना जाता है।
मेडल से भरा है दोनों अफसरों का कंधा
यह पहली बार नहीं है जब इन दोनों अफसरों की बहादुरी को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला हो। इससे पहले भी:
- लक्ष्मण केवट: को 6 बार ‘राष्ट्रपति पुलिस पदक’ से सम्मानित किया जा चुका है। (वर्तमान तैनाती: पाखंजूर)
- रामेश्वर देशमुख: को 2 बार राष्ट्रपति से सम्मान मिल चुका है। (वर्तमान तैनाती: थाना प्रभारी, भानुप्रतापपुर)
”पूरे प्रदेश के लिए गर्व का क्षण” – एसपी निखिल राखेचा
इस ऐतिहासिक और गौरवमयी अवसर पर कांकेर के एसपी निखिल आकाश राखेचा ने खुशी जाहिर करते हुए कहा:
”यह सिर्फ कांकेर पुलिस के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए बेहद गर्व की बात है कि हमारे दो जांबाज अफसरों को महामहिम राष्ट्रपति ने सम्मानित किया है। मुश्किल और चुनौतीपूर्ण इलाकों में अपनी जान हथेली पर रखकर काम करने वाले दूसरे जवानों के लिए यह सम्मान एक बहुत बड़ी प्रेरणा बनेगा।”




