धर्मांतरण के खिलाफ एकजुट हुए 4 गांवों के ग्रामीण, आदिवासी संस्कृति को बचाने के लिए बड़ी बैठक
आदिवासी संस्कृति और अस्तित्व खतरे में

भानुप्रतापपुर / संतोष गर्ग। विक्रमगंज (बांसला) में धर्मांतरण के बढ़ते मामलों को लेकर एक वृहद और महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में क्षेत्र के चार प्रमुख गांवों—बोटेचांग, विक्रमगंज, जुनवानी और कोकड़े—के ग्रामीण और समाज प्रमुख बड़ी संख्या में एकजुट हुए। बैठक में मुख्य रूप से आदिवासी संस्कृति, परंपराओं के संरक्षण और धर्मांतरण से उत्पन्न हो रही चुनौतियों पर गंभीर चर्चा की गई।
संस्कृति और अस्तित्व पर संकट:

बैठक को संबोधित करते हुए ग्रामीण और आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि धर्मांतरण हमारे गांव, समाज और सदियों पुरानी आदिवासी संस्कृति के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन चुका है। बाहरी तत्वों द्वारा सीधे-साधे ग्रामीणों को भ्रमित कर उनका धर्मांतरण कराया जा रहा है, जिससे न केवल परिवारों में बिखराव हो रहा है, बल्कि हमारी पारंपरिक पहचान और अस्तित्व पर भी संकट मंडरा रहा है।
बैठक में लिए गए अहम निर्णय:

घंटों चली इस बैठक में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए:
सांस्कृतिक जागरूकता: गांवों में अपनी मूल संस्कृति, रीति-रिवाजों और परंपराओं के प्रति युवाओं और बच्चों को जागरूक किया जाएगा।
निगरानी समिति: बाहरी और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ग्राम स्तर पर समितियों का गठन किया जाएगा।
सामाजिक एकजुटता: किसी भी प्रकार के प्रलोभन या दबाव में आकर धर्मांतरण करने वालों को समझाइश दी जाएगी और समाज को टूटने से बचाया जाएगा।
बैठक के अंत में चारों गांवों के नागरिकों ने सामूहिक संकल्प लिया कि वे अपनी जल, जंगल, जमीन और आदिवासी संस्कृति की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहेंगे और किसी भी कीमत पर अपनी परंपराओं से समझौता नहीं करेंगे। बैठक में चारों ग्रामों के पटेल, मांजी, युवा वर्ग और मातृशक्ति भारी संख्या में उपस्थित रहे।




