छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: स्कूलों में मंत्रोच्चार के खिलाफ दायर जनहित याचिका सबूतों के अभाव में खारिज
भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश प्रचार-प्रसार मंत्री नरोत्तम सिंह चौहान ने कोर्ट के निर्णय का किया स्वागत

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश के स्कूलों में मंत्रों और प्रार्थनाओं के अनिवार्य पाठ के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया है। अदालत ने मामले में हस्तक्षेप करने से साफ इनकार करते हुए कहा कि इस संबंध में अभी तक कोई ठोस सबूत पेश नहीं किए गए हैं। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में किसी स्कूल में अनिवार्य मंत्रोच्चार से जुड़ा कोई पुख्ता साक्ष्य (जैसे वीडियो या दस्तावेज) सामने आता है, तो याचिकाकर्ता नई याचिका दायर करने के लिए स्वतंत्र हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह याचिका छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष अब्दुल सलमान रिजवी द्वारा दायर की गई थी। याचिका में छत्तीसगढ़ सरकार के आगामी 12 जून के एक आदेश को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता डॉ. आमिर खान ने तर्क दिया कि यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 28 (Article 28) का उल्लंघन है, जो राज्य द्वारा वित्तपोषित शिक्षण संस्थानों में धार्मिक शिक्षा थोपे जाने से नागरिकों को स्वतंत्रता प्रदान करता है।
सरकार के आदेश में क्या था शामिल?
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जारी आदेश के तहत स्कूलों में दिन में तीन बार विशेष प्रार्थना और मंत्रोच्चार को शामिल करने की बात कही गई थी:
- सुबह की प्रार्थना: राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत के साथ दीप मंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र और महापुरुषों की जीवनियों का पाठ।
लंच के समय: सभी छात्रों द्वारा मिलकर ‘भोजन मंत्र’ का पाठ।
- छुट्टी के समय: राज्य गीत, गायत्री मंत्र और शांति मंत्र का पाठ।
भाजपा ने किया फैसले का स्वागत
हाईकोर्ट के इस फैसले पर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश प्रचार-प्रसार मंत्री नरोत्तम सिंह चौहान ने कोर्ट के निर्णय का स्वागत किया है।
“किसी भी छात्र को मंत्रोच्चार के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य शिक्षा के साथ-साथ छात्रों में अनुशासन, नैतिक मूल्य, आत्मविश्वास और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में मूल्यपरक शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है।” — नरोत्तम सिंह चौहान, भाजपा नेता
अदालत के इस रुख के बाद अब यह साफ हो गया है कि जब तक किसी संस्थान में जबरन मंत्रपाठ कराने के प्रत्यक्ष प्रमाण सामने नहीं आते, तब तक सरकार के इस सांस्कृतिक और नैतिक शिक्षा से जुड़े आदेश पर कोई रोक नहीं रहेगी।




