‘टेढ़ी’ पुलिया और मंडी बोर्ड का ‘सीधा’ खेल: दमकसा में भ्रष्टाचार का नायाब मॉडल, सूचना बोर्ड गायब, फर्जी टेस्टिंग रिपोर्ट पर उठे सवाल
शीतला मंदिर मार्ग पर घटिया निर्माण से ग्रामीणों में भारी आक्रोश; बिना कंक्रीट क्यूब बनाए लैब टेस्ट रिपोर्ट जारी होने और सूचना बोर्ड न लगाने पर उठे सवाल।

Editor: Santosh Garg / Jungle News Live/ Contect: 8878567499
भानुप्रतापपुर (कांकेर): कांकेर जिले के दुर्गुकोंदल ब्लॉक अंतर्गत ग्राम दमकसा में मंडी बोर्ड के अधिकारियों और ठेकेदार की सांठगांठ से 37 लाख रुपये की लागत से बन रही पुलिया निर्माण में भारी धांधली का मामला सामने आया है। ग्रामीणों की लंबी मांग के बाद स्वीकृत हुए बजट से तैयार की जा रही यह पुलिया मजबूती और गुणवत्ता के मानकों पर खरी उतरने के बजाय प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार का नमूना बनती दिख रही है।
प्रमुख बिंदु
निर्माण स्थल व लागत: ग्राम दमकसा (शीतला मंदिर मुख्य मार्ग) में 37 लाख रुपये का स्वीकृत बजट।
तकनीकी खामियां: अनट्रेंड मिस्त्रियों से काम कराने के कारण पुलिया की दीवारें अड़ी-तिरछी, फिनिशिंग के नाम पर केवल लीपापोती।
फर्जी रिपोर्ट का आरोप: निर्माण स्थल पर बिना कंक्रीट क्यूब तैयार किए दुर्ग स्थित RES टेस्टिंग सेंटर से ओके रिपोर्ट जारी।
इंजीनियर का अजब फरमान: मंडी बोर्ड के इंजीनियर राहुल जायसवाल का बयान—”हमारे विभाग में निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड लगाना मना है।”
अड़ी-तिरछी दीवारें और अनट्रेंड कारीगर
ग्राम दमकसा के ग्रामीण लंबे समय से माता शीतला मंदिर जाने वाले मुख्य मार्ग पर पुलिया निर्माण की मांग कर रहे थे। प्रशासन ने 37 लाख रुपये का बजट तो पास कर दिया, लेकिन धरातल पर काम का स्तर बेहद घटिया है।
साइट पर कार्यरत मजदूरों के अनुसार, ठेकेदार द्वारा लागत बचाने के चक्कर में कुशल कारीगरों के बजाय अनट्रेंड मिस्त्रियों से काम कराया जा रहा है। इसके चलते पुलिया की दीवारें सीधी बनने के बजाय लहराती हुई (अड़ी-तिरछी) खड़ी कर दी गई हैं। निर्माण की स्थिति देखकर ग्रामीणों को डर है कि पहली ही बारिश में यह संरचना बह जाएगी।
बिना क्यूब बनाए पास हो गई टेस्टिंग रिपोर्ट
निर्माण की गुणवत्ता पर सबसे बड़ा सवाल कंक्रीट टेस्टिंग प्रक्रिया को लेकर उठ रहा है। नियमानुसार कंक्रीट की मजबूती जांचने के लिए निर्माण स्थल पर कंक्रीट के ‘क्यूब’ (Cube) बनाए जाते हैं, जिन्हें लैब में टेस्ट किया जाता है। आरोप है कि दमकसा साइट पर कभी क्यूब बनाए ही नहीं गए। इसके बावजूद दुर्ग स्थित RES विभाग के टेस्टिंग सेंटर से जांच रिपोर्ट ‘ओके’ जारी कर दी गई, जो सीधे तौर पर कागजी फर्जीवाड़े की ओर इशारा करता है।
‘सूचना बोर्ड लगाना हमारे यहाँ मना है’ — इंजीनियर का अजीब तर्क
सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार हर सार्वजनिक निर्माण कार्य स्थल पर प्रोजेक्ट का नाम, लागत, ठेकेदार का नाम और कार्य की समय-सीमा दर्शाने वाला सूचना बोर्ड लगाना अनिवार्य होता है। जब इस संबंध में मंडी बोर्ड के इंजीनियर राहुल जायसवाल से पूछा गया, तो उन्होंने अजीबो-गरीब तर्क देते हुए कहा कि “उनके विभाग में निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड नहीं लगाया जाता।” इस बयान के बाद पारदर्शिता और विभागीय मंशा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
ग्रामीणों की चेतावनी: उच्च स्तरीय जांच नहीं तो आंदोलन
घटिया निर्माण और विभागीय लीपापोती को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में तीव्र आक्रोश है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने और दोषी इंजीनियर व ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि त्वरित कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे।





